भारत में तेजी से बढ़ रहा ब्रेस्ट कैंसर का खतरा, 30 साल में 1.3 गुना बढ़े मामले; 2050 तक स्थिति हो सकती है और गंभीर....

Mar 9, 2026 - 10:31
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भारत में तेजी से बढ़ रहा ब्रेस्ट कैंसर का खतरा, 30 साल में 1.3 गुना बढ़े मामले; 2050 तक स्थिति हो सकती है और गंभीर....

अध्ययन में खुलासा – जीवनशैली, महंगा इलाज और बढ़ते जोखिम कारक बन रहे बड़ी चुनौती

नई दिल्ली, 8 मार्च 2026। भारत में महिलाओं के स्वास्थ्य के सामने स्तन कैंसर एक तेजी से बढ़ती गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। प्रतिष्ठित चिकित्सा पत्रिका The Lancet Oncology में प्रकाशित एक वैश्विक अध्ययन के अनुसार पिछले तीन दशकों में देश में ब्रेस्ट कैंसर के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते प्रमुख जोखिम कारकों पर नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में स्थिति और अधिक चिंताजनक हो सकती है।

अध्ययन के अनुसार (Global Burden of Disease Study Breast Cancer Collaborators) के तहत 204 देशों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में वर्ष 1990 से 2023 के बीच स्तन कैंसर के मामलों में लगभग 1.3 गुना वृद्धि हुई है।

आंकड़ों के मुताबिक 1990 में प्रति एक लाख महिलाओं में स्तन कैंसर के लगभग 13 मामले दर्ज होते थे, जो 2023 तक बढ़कर 29.4 प्रति लाख हो गए। इसी अवधि में आयु-मानकीकृत मृत्यु दर भी 8.9 से बढ़कर 15.5 तक पहुंच गई है, जिसके कारण स्तन कैंसर से होने वाली मौतों में करीब 74 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

अध्ययन के अनुसार ब्रेस्ट कैंसर दुनिया भर में महिलाओं में कैंसर से जुड़ी बीमारी और समय से पहले मृत्यु का प्रमुख कारण बना हुआ है। अनुमान है कि वर्ष 2026 में वैश्विक स्तर पर स्तन कैंसर के लगभग 23 लाख नए मामले सामने आएंगे और करीब 7.6 लाख लोगों की मृत्यु हो सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मौजूदा प्रवृत्ति जारी रही तो 2050 तक वैश्विक स्तर पर स्तन कैंसर के मामलों में लगभग एक तिहाई की वृद्धि हो सकती है और यह संख्या 35 लाख तक पहुंच सकती है।

मुंबई स्थित Tata Memorial Centre से जुड़े एक अध्ययन में सामने आया है कि आधुनिक कैंसर उपचार, विशेषकर इम्यूनोथेरेपी, अधिकांश रोगियों के लिए बेहद महंगा साबित हो रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार Pembrolizumab नामक इम्यूनोथेरेपी दवा का छह महीने का उपचार कोर्स भारत में औसत मासिक आय से लगभग 80 गुना अधिक महंगा पड़ सकता है, जिससे बड़ी संख्या में मरीजों के लिए उपचार कराना कठिन हो जाता है।

2023 के वैश्विक आंकड़ों के अनुसार 55 वर्ष या उससे अधिक आयु की महिलाओं में स्तन कैंसर के नए मामले 20 से 54 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक पाए गए। हालांकि 1990 के बाद से युवा आयु वर्ग की महिलाओं में भी इसके मामलों में धीरे-धीरे वृद्धि दर्ज की जा रही है।

अध्ययन में बताया गया है कि भारत जैसे मध्यम आय वाले देशों में स्तन कैंसर का आर्थिक बोझ भी तेजी से बढ़ रहा है। वर्ष 2021 में इसका कुल आर्थिक बोझ लगभग 74,474 करोड़ रुपये आंका गया था, जो 2030 तक बढ़कर लगभग 1,28,957 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।

विशेषज्ञों के अनुसार स्तन कैंसर के बढ़ते मामलों के पीछे कई जीवनशैली से जुड़े जोखिम कारक जिम्मेदार हैं। इनमें अत्यधिक रेड मीट का सेवन, तंबाकू का उपयोग, उच्च रक्त शर्करा स्तर और बढ़ा हुआ बॉडी मास इंडेक्स (BMI) प्रमुख हैं।

डॉक्टरों का मानना है कि समय पर जांच, जागरूकता, संतुलित जीवनशैली और स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर उपलब्धता से स्तन कैंसर के बढ़ते खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है

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