आज की युवा पीढ़ी को सीख दे रही है डॉ. मंगला कपूर की ज़िंदगी 12 साल की उम्र में एसिड अटैक, 36 सर्जरी, फिर भी बनाया इतिहास....

Jan 28, 2026 - 19:49
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आज की युवा पीढ़ी को सीख दे रही है डॉ. मंगला कपूर की ज़िंदगी  12 साल की उम्र में एसिड अटैक, 36 सर्जरी,  फिर भी बनाया इतिहास....

वाराणसी।

आज जब ज़रा-सी असफलता पर युवा टूटने लगते हैं, तब वाराणसी की डॉ. मंगला कपूर की ज़िंदगी एक आईना है—जो बताती है कि संघर्ष अंत नहीं, शुरुआत हो सकता है। महज़ 12 वर्ष की उम्र में हुए एसिड अटैक ने उनके शरीर को झुलसा दिया, लेकिन उनके आत्मबल को नहीं जला पाया। आज वही महिला पद्म श्री 2026 के लिए चयनित हुई हैं।

 दर्द, ताने और अकेलापन… फिर भी नहीं मानी हार

एसिड अटैक के बाद डॉ. मंगला कपूर को लगातार छह वर्षों तक अस्पतालों में रहना पड़ा। इस दौरान 36 से अधिक सर्जरी हुईं।

शरीर पर पड़े ज़ख़्मों से कहीं ज़्यादा दर्दनाक थे समाज के ताने, घूरती निगाहें और उपेक्षा। कई बार वे अंदर से पूरी तरह टूट गईं, लेकिन हर बार खुद से कहा—। “रुकना विकल्प नहीं है।”

 शिक्षा और संगीत: आज की पीढ़ी के लिए सबसे बड़ा सबक, इलाज के लंबे दौर में शिक्षा और संगीत ही उनका सहारा बने । आज की युवा पीढ़ी, जो मोबाइल और सोशल मीडिया में उलझी है, उनके लिए डॉ. मंगला कपूर की ज़िंदगी यह सिखाती है कि

👉 ज्ञान और कला इंसान को टूटने नहीं देती।

कठिन हालात के बावजूद उन्होंने BHU से ग्रेजुएशन, पोस्ट-ग्रेजुएशन, और PhD की पढ़ाई पूरी की। कई बार विश्वविद्यालय तक पैदल जाना पड़ा, अच्छे कपड़े तक नहीं थे—लेकिन सपने इतने मजबूत थे कि गरीबी भी हार गई।

आज के युवाओं के लिए बड़ा सवाल

आज की पीढ़ी से सवाल है— अगर डॉ. मंगला कपूर जैसी परिस्थितियों में भी पढ़ाई नहीं छोड़ी, तो आज के युवाओं को निराश होने का हक़ किसने दिया? उनकी कहानी बताती है कि सुविधाओं की कमी बहाना नहीं हो सकती असफलता डरने की वजह नहीं और हालात कभी भविष्य तय नहीं करते

 छात्रा से प्रोफेसर बनने तक का सफर

जिस बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में वे कभी संघर्षरत छात्रा थीं, वहीं आगे चलकर वे संगीत की प्रोफेसर बनीं। उन्होंने 30 वर्षों तक BHU में सेवा दी और वर्ष 2019 में सेवानिवृत्त हुईं। वे ग्वालियर संगीत घराने से जुड़ी रहीं और संगीत को सिर्फ पेशा नहीं, बल्कि साधना माना।

 सफलता के बाद भी सेवा का रास्ता नहीं छोड़ा, आज की पीढ़ी जहां सफलता के बाद सिर्फ अपने बारे में सोचती है, वहीं डॉ. मंगला कपूर आज भी बिना फीस बच्चों को संगीत सिखा रही हैं, दिव्यांग बच्चों के साथ काम कर रही हैं, और समाज को लौटाने को जीवन का उद्देश्य मानती हैं।

 पद्म श्री 2026: सिर्फ सम्मान नहीं, संदेश भी

डॉ. मंगला कपूर को पद्म श्री 2026 मिलना सिर्फ एक उपलब्धि नहीं, बल्कि आज की युवा पीढ़ी के नाम एक संदेश है—

“अगर इरादे मजबूत हों, तो हालात हार जाते हैं।”

 युवाओं के लिए 5 सीख

डॉ. मंगला कपूर की ज़िंदगी से

1️⃣ मुश्किलें आएँगी, लेकिन रुकना नहीं

2️⃣ शिक्षा सबसे बड़ी पूंजी है

3️⃣ हालात पहचान नहीं बनाते

4️⃣ सफलता के बाद भी संवेदनशील बने रहो

5️⃣ समाज को कुछ लौटाना ज़रूरी है

✨ यह कहानी सिर्फ संघर्ष की नहीं…

यह कहानी आज की पीढ़ी को झकझोरने वाली है

यह कहानी सिखाती है—हार मानना विकल्प नहीं

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