अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगों के हौंसले बुलंद, जिलाधिकारी की फोटो लगाकर व्हाट्सएप पर फर्जी आईडी बनाकर अधिकारियों को भेजे गए मैसेज.........

Feb 5, 2026 - 09:35
Feb 5, 2026 - 09:36
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अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगों के हौंसले बुलंद,  जिलाधिकारी की फोटो लगाकर व्हाट्सएप पर फर्जी आईडी बनाकर अधिकारियों को भेजे गए मैसेज.........

उत्तराखंड/चम्पावत

अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराधियों के हौसले इस कदर बुलंद हो चुके हैं कि अब वे प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों को भी निशाना बनाने से नहीं चूक रहे। ताजा मामला चम्पावत जनपद से सामने आया है, जहां अज्ञात साइबर ठगों ने जिलाधिकारी मनीष कुमार की फोटो का दुरुपयोग करते हुए व्हाट्सएप पर फर्जी आईडी बना ली। साइबर अपराधियों के हौंसले इतने बुलंद हैं कि विदेशी नंबर से अधिकारियों को अंग्रेजी में मैसेज के जरिए हालचाल पूछकर बनाया भरोसे का माहौल। 

बुधवार को वियतनाम के +84 564261676 नंबर से जिले के कई अधिकारियों के व्हाट्सएप पर अंग्रेजी भाषा में संदेश आने लगे। जब अधिकारियों ने प्रोफाइल चेक की तो उसमें जिलाधिकारी मनीष कुमार की फोटो लगी हुई थी। विदेशी नंबर देखकर अधिकारी सतर्क हो गए और मामले की सूचना आपस में साझा की। शक होने पर तुरंत उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया।

वन विभाग के एसडीओ सुनील कुमार को भी इसी नंबर से “Hello” का मैसेज प्राप्त हुआ। शक होने पर उन्होंने तुरंत डीआईओ धीरज कार्की को इसकी जानकारी दी। डीआईओ ने नंबर को ब्लॉक कर दिया और पूरे मामले से जिलाधिकारी को अवगत कराया।

जिलाधिकारी मनीष कुमार ने तत्परता दिखाते हुए आम जनता और अधिकारियों से इस तरह के संदेशों की अनदेखी करने की अपील की। उन्होंने फर्जी व्हाट्सएप आईडी का स्क्रीनशॉट अपने स्टेटस पर साझा कर लोगों को सतर्क किया। इसके साथ ही डीएम कार्यालय की ओर से पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई गई।

थानाध्यक्ष बीएस बिष्ट ने बताया कि डीएम कार्यालय के माध्यम से शिकायत प्राप्त हुई है और मामले की जांच साइबर सेल द्वारा की जा रही है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध कॉल या मैसेज पर प्रतिक्रिया न दें।

गौरतलब है कि अगस्त 2024 में भी तत्कालीन जिलाधिकारी नवनीत पांडेय की फर्जी व्हाट्सएप आईडी बनाकर अधिकारियों व कर्मचारियों से पैसे मांगे गए थे। इससे पहले पूर्व सूचना अधिकारी गिरिजा शंकर जोशी के नाम से भी इसी तरह की ठगी की गई थी, जिसमें कुछ लोगों ने रकम ट्रांसफर भी कर दी थी।

एक बड़ा सवाल यह भी है कि जब IAS अधिकारी भी सुरक्षित नहीं, तो आम आदमी कितना असुरक्षित?

जब आईएएस स्तर के अधिकारियों की फोटो लगाकर साइबर ठग इस तरह की ठगी कर सकते हैं, तो आम नागरिकों के साथ होने वाले साइबर फ्रॉड की भयावहता का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। यह घटना एक बार फिर डिजिटल सतर्कता और साइबर जागरूकता की जरूरत को रेखांकित करती है।

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